अयोध्या में बढ़ी हलचल! चंपत राय के इस्तीफे पर संत समाज ने बदल दिया पूरा माहौल
Champat Rai Resignation News:अयोध्या | श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी चंपत राय के इस्तीफे को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच उत्तर प्रदेश का संत समाज उनके समर्थन में खुलकर सामने आ गया है। संतों ने ट्रस्ट से अपील की है कि चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार न किया जाए, क्योंकि उन्होंने वर्षों तक राम मंदिर आंदोलन और मंदिर निर्माण के लिए निस्वार्थ भाव से सेवा की है।
संतों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति के बारे में अंतिम निर्णय जांच पूरी होने के बाद ही लिया जाना चाहिए। ऐसे में जल्दबाजी में इस्तीफा स्वीकार करना उचित नहीं होगा।
Champat Rai Resignation:संत परिषद ने जताया पूरा भरोसा
उत्तर प्रदेश संत परिषद के पदाधिकारियों ने कहा कि चंपत राय राम मंदिर आंदोलन के उन प्रमुख चेहरों में रहे हैं जिन्होंने दशकों तक बिना किसी व्यक्तिगत स्वार्थ के कार्य किया। उनका मानना है कि यदि उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा सौंपा भी है, तब भी ट्रस्ट को उसे स्वीकार करने से पहले सभी तथ्यों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
संत समाज का कहना है कि किसी भी जांच के निष्कर्ष आने से पहले किसी व्यक्ति की छवि पर प्रश्नचिह्न लगाना उचित नहीं है।
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आखिर क्यों चर्चा में आया इस्तीफा?
हाल के दिनों में राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चढ़ावे और उससे जुड़े कुछ वित्तीय मामलों को लेकर जांच शुरू हुई है। इसी दौरान चंपत राय ने नैतिक आधार पर अपना इस्तीफा ट्रस्ट को सौंप दिया। उनके साथ ट्रस्ट के एक अन्य सदस्य ने भी इस्तीफा दिया था।
ट्रस्ट की ओर से पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है कि यह कदम जांच प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।
जांच एजेंसियां कर रही हैं पड़ताल
मामले की जांच संबंधित एजेंसियों द्वारा की जा रही है। दस्तावेजों की जांच, पूछताछ और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं जारी हैं। अब तक किसी भी जांच एजेंसी या अदालत ने चंपत राय को दोषी नहीं ठहराया है।
यही वजह है कि संत समाज का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
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ट्रस्ट की बैठक पर टिकी निगाहें

सूत्रों के मुताबिक श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की आगामी बैठक में चंपत राय के इस्तीफे पर चर्चा हो सकती है। इसी बैठक में यह तय किया जा सकता है कि उनका इस्तीफा स्वीकार किया जाए या नहीं।
संत समाज ने ट्रस्ट से आग्रह किया है कि अंतिम निर्णय लेने से पहले उनके लंबे योगदान और वर्तमान जांच की स्थिति को ध्यान में रखा जाए।
राम मंदिर आंदोलन में अहम रही भूमिका
चंपत राय लंबे समय से विश्व हिंदू परिषद और राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े रहे हैं। मंदिर निर्माण से संबंधित कई महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं और समन्वय की जिम्मेदारी उन्होंने निभाई। अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण की प्रक्रिया के दौरान भी उनकी भूमिका काफी महत्वपूर्ण मानी जाती रही है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज
इस पूरे घटनाक्रम के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से लगातार बयान सामने आ रहे हैं। वहीं विश्व हिंदू परिषद और कई संत संगठनों ने चंपत राय के समर्थन में खुलकर अपनी राय रखी है। उनका कहना है कि जांच पूरी होने तक किसी भी तरह का पूर्वाग्रह उचित नहीं होगा।
आगे क्या हो सकता है?
अब सबकी निगाहें ट्रस्ट की अगली बैठक और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट पर टिकी हैं। यदि ट्रस्ट संत समाज की अपील पर विचार करता है तो चंपत राय का इस्तीफा फिलहाल लंबित रखा जा सकता है। वहीं जांच पूरी होने के बाद ही इस पूरे मामले पर अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।
निष्कर्ष
चंपत राय के इस्तीफे ने राम मंदिर ट्रस्ट और संत समाज के बीच एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है। एक ओर जांच प्रक्रिया जारी है, तो दूसरी ओर संत समाज उनके लंबे योगदान का हवाला देकर ट्रस्ट से इस्तीफा स्वीकार न करने की अपील कर रहा है। अब देखना होगा कि ट्रस्ट की अगली बैठक में इस मुद्दे पर क्या फैसला लिया जाता है।
Disclaimer: यह मामला जांच के अधीन है। अब तक किसी भी सक्षम अदालत ने चंपत राय के खिलाफ कोई आरोप सिद्ध नहीं किया है। अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।