संसद के मानसून सत्र के दौरान हुए संसद मार्च को लेकर जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। अब दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और अन्य जांच एजेंसियां इस प्रदर्शन से जुड़े डिजिटल नेटवर्क, सोशल मीडिया गतिविधियों और कथित विदेशी कनेक्शन की भी गहराई से पड़ताल कर रही हैं। शुरुआती जांच में कुछ ऐसे सोशल मीडिया अकाउंट्स सामने आए हैं, जिनकी गतिविधियां संदिग्ध मानी जा रही हैं। इनमें कुछ अकाउंट्स का संबंध पाकिस्तान से होने की भी आशंका जताई जा रही है।
हालांकि, जांच एजेंसियों ने अभी तक किसी भी विदेशी भूमिका की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जा रही है।
क्या है पूरा मामला?
संसद के मानसून सत्र के पहले दिन विभिन्न संगठनों और प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर मार्च निकालने का प्रयास किया। सुरक्षा कारणों से दिल्ली पुलिस ने कई स्थानों पर बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। इसी दौरान कुछ जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की और तनाव की स्थिति भी देखने को मिली।
घटना के बाद सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में वीडियो, फोटो और पोस्ट वायरल होने लगे। इन्हीं पोस्टों की जांच करते हुए पुलिस की नजर कुछ संदिग्ध डिजिटल गतिविधियों पर गई।
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पाकिस्तान से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट्स पर क्यों है नजर?
जांच में शामिल अधिकारियों के अनुसार, कुछ विदेशी सोशल मीडिया अकाउंट्स ने प्रदर्शन से जुड़ी सामग्री को तेजी से शेयर और प्रमोट किया। इनमें कुछ अकाउंट्स की लोकेशन और गतिविधियां पाकिस्तान से जुड़ी होने की आशंका जताई गई है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि ये अकाउंट्स केवल खबरें साझा कर रहे थे या फिर किसी सुनियोजित अभियान का हिस्सा थे।
टूलकिट एंगल की भी हो रही जांच
दिल्ली पुलिस कथित “टूलकिट” एंगल की भी जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि यदि किसी डिजिटल दस्तावेज या सोशल मीडिया रणनीति के जरिए प्रदर्शन को संगठित करने या किसी विशेष नैरेटिव को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया है, तो उसकी भी विस्तृत जांच की जाएगी।
फिलहाल पुलिस ने इस संबंध में किसी भी टूलकिट के मिलने या उसके प्रमाणित होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
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डिजिटल फॉरेंसिक टीम जुटा रही सबूत
जांच एजेंसियां वायरल वीडियो, सोशल मीडिया पोस्ट, मैसेजिंग ऐप्स पर साझा किए गए संदेश और डिजिटल डेटा का फॉरेंसिक विश्लेषण कर रही हैं। विशेषज्ञ यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि इन पोस्टों का स्रोत क्या था और इन्हें किस तरह व्यापक स्तर पर फैलाया गया।
जरूरत पड़ने पर सोशल मीडिया कंपनियों से भी तकनीकी जानकारी मांगी जा सकती है।
पुलिस का क्या कहना है?
दिल्ली पुलिस का कहना है कि संसद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता थी। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के लिए निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया, जिसके चलते कार्रवाई करनी पड़ी।
पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था भंग करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी, वहीं डिजिटल माध्यमों से गलत सूचना फैलाने वालों की भी पहचान की जा रही है।
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विपक्ष और प्रदर्शनकारियों का पक्ष
प्रदर्शन में शामिल संगठनों और विपक्षी नेताओं ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन को रोका गया और कई लोगों के साथ सख्ती बरती गई।
वहीं पुलिस का कहना है कि सुरक्षा कारणों को देखते हुए आवश्यक कदम उठाए गए और किसी भी अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़े प्रदर्शन या संवेदनशील घटना के दौरान सोशल मीडिया पर गलत सूचना तेजी से फैल सकती है। ऐसे मामलों में डिजिटल फॉरेंसिक जांच बेहद महत्वपूर्ण होती है, ताकि तथ्य और अफवाह के बीच अंतर स्पष्ट किया जा सके।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि किसी विदेशी कनेक्शन की पुष्टि केवल तकनीकी और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर ही की जा सकती है, इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
आगे क्या होगा?
दिल्ली पुलिस की जांच अभी जारी है। आने वाले दिनों में डिजिटल साक्ष्यों, सोशल मीडिया डेटा और अन्य तकनीकी जानकारियों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि किसी विदेशी नेटवर्क, टूलकिट या संगठित डिजिटल अभियान के सबूत मिलते हैं तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है।
निष्कर्ष
संसद मार्च से जुड़ा यह मामला अब केवल सड़क पर हुए प्रदर्शन तक सीमित नहीं रह गया है। जांच एजेंसियां इसके डिजिटल और साइबर पहलुओं की भी गंभीरता से पड़ताल कर रही हैं। हालांकि, पाकिस्तान कनेक्शन या कथित टूलकिट को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। ऐसे में जांच पूरी होने तक किसी भी दावे को अंतिम सत्य मानना उचित नहीं होगा।
