Durand Cup 2026 Final: कोलकाता के फुटबॉल मैदान पर रविवार को ऐसा मुकाबला देखने को मिला, जिसे ईस्ट बंगाल के फैंस शायद लंबे समय तक नहीं भूलेंगे। 135वें डूरंड कप के फाइनल में ईस्ट बंगाल एफसी ने अपने चिर प्रतिद्वंद्वी मोहन बागान सुपर जायंट को 4-1 से करारी शिकस्त देकर खिताब अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ ईस्ट बंगाल ने 22 साल से चले आ रहे डूरंड कप ट्रॉफी के इंतजार को खत्म कर दिया।
फाइनल के सबसे बड़े हीरो रहे एडमंड ललरिंदिका। उन्होंने पहले हाफ में ही शानदार हैट्रिक लगाकर मैच की दिशा तय कर दी। ईस्ट बंगाल की तरफ से बिपिन सिंह ने भी एक गोल किया, जबकि मोहन बागान के लिए मनवीर सिंह ने एकमात्र गोल दागा।
22 साल बाद ईस्ट बंगाल ने फिर जीता डूरंड कप
ईस्ट बंगाल के लिए यह जीत किसी सामान्य ट्रॉफी से कहीं ज्यादा मायने रखती है। क्लब ने आखिरी बार 2004 में डूरंड कप जीता था। उस फाइनल में भी ईस्ट बंगाल के सामने मोहन बागान था और उसने 2-1 से जीत दर्ज की थी।
इसके बाद 22 साल तक ईस्ट बंगाल इस प्रतिष्ठित ट्रॉफी से दूर रहा। 2026 में फिर वही कोलकाता डर्बी फाइनल में पहुंची और इस बार ईस्ट बंगाल ने इतिहास ही बदल दिया।
इस जीत के साथ ईस्ट बंगाल ने अपना 17वां डूरंड कप खिताब जीत लिया। अब टूर्नामेंट के सबसे ज्यादा खिताब जीतने के मामले में ईस्ट बंगाल और मोहन बागान दोनों के नाम 17-17 ट्रॉफियां हैं।
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शुरुआत से ही ईस्ट बंगाल का दबदबा
फाइनल में उम्मीद थी कि दोनों कोलकाता दिग्गजों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिलेगी। आखिर यह सिर्फ एक फाइनल नहीं, बल्कि प्रतिष्ठित कोलकाता डर्बी भी था।
लेकिन मैदान पर ईस्ट बंगाल ने शुरुआत से ही अपनी आक्रामक रणनीति साफ कर दी। टीम ने लगातार मोहन बागान के डिफेंस पर दबाव बनाया और ज्यादा समय तक विपक्षी टीम को संभलने का मौका नहीं दिया।
मैच के 10वें मिनट में बिपिन सिंह ने ईस्ट बंगाल को 1-0 की बढ़त दिलाई। उनका शानदार लेफ्ट-फुट फिनिश मोहन बागान के लिए पहला बड़ा झटका था।
अभी मोहन बागान इस गोल से उबर भी नहीं पाया था कि कुछ ही मिनटों में कहानी पूरी तरह बदल गई।
एडमंड ललरिंदिका ने शुरू किया गोलों का तूफान
12वें मिनट में एडमंड ललरिंदिका ने ईस्ट बंगाल की बढ़त 2-0 कर दी।
यह गोल मोहन बागान के लिए बड़ा झटका था। ईस्ट बंगाल ने शुरुआत में जिस तेजी से हमला किया, उसने विपक्षी डिफेंस को लगातार दबाव में रखा।
इसके बाद एडमंड ने एक बार फिर अपना कमाल दिखाया।
22वें मिनट में उन्होंने अपना दूसरा गोल दाग दिया, जिससे ईस्ट बंगाल 3-0 से आगे हो गया।
फाइनल के सिर्फ 22 मिनट में ईस्ट बंगाल ने तीन गोल कर दिए थे। स्टेडियम में मौजूद लाल-पीले समर्थकों का उत्साह बढ़ता जा रहा था, जबकि मोहन बागान के सामने अब मैच में वापसी की बड़ी चुनौती थी।
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मनवीर सिंह ने जगाई मोहन बागान की उम्मीद
तीन गोल से पिछड़ने के बाद मोहन बागान ने जवाब देने की कोशिश की और इसका फायदा भी मिला।
33वें मिनट में मनवीर सिंह ने गोल करके स्कोर 3-1 कर दिया।
इस गोल के बाद मोहन बागान के समर्थकों को लगा कि शायद टीम मुकाबले में वापस लौट सकती है। लेकिन ईस्ट बंगाल ने अपनी पकड़ ढीली नहीं पड़ने दी।
पहला हाफ खत्म होने से ठीक पहले एडमंड ने फिर हमला बोला और फाइनल की सबसे बड़ी कहानी लिख दी।
44वें मिनट में एडमंड की हैट्रिक पूरी
44वें मिनट में एडमंड ललरिंदिका ने अपना तीसरा गोल कर हैट्रिक पूरी कर ली।
पहले हाफ में तीन गोल करना अपने आप में शानदार उपलब्धि थी, लेकिन जब सामने मोहन बागान जैसा चिर प्रतिद्वंद्वी हो और मुकाबला डूरंड कप का फाइनल हो, तो इस प्रदर्शन की अहमियत और बढ़ जाती है।
पहले 45 मिनट खत्म होने तक स्कोर ईस्ट बंगाल 4-1 मोहन बागान था। ईस्ट बंगाल ने लगभग पूरे मुकाबले पर अपनी पकड़ बना ली थी।
दूसरे हाफ में मोहन बागान की कोशिश, लेकिन नहीं बदला नतीजा
दूसरे हाफ में मोहन बागान ने वापसी की पूरी कोशिश की। टीम को जल्दी गोल की जरूरत थी, लेकिन ईस्ट बंगाल ने अपनी रक्षात्मक संरचना को मजबूत बनाए रखा।
ईस्ट बंगाल ने जरूरत के हिसाब से खेल को नियंत्रित किया और मोहन बागान को लगातार खतरनाक मौके बनाने से रोका।
दूसरे हाफ में कोई और गोल नहीं हुआ।
अंतिम सीटी बजते ही ईस्ट बंगाल के खिलाड़ियों और समर्थकों का जश्न शुरू हो गया। 4-1 की जीत के साथ 22 साल बाद डूरंड कप की ट्रॉफी ईस्ट बंगाल के हाथ में थी।
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फाइनल के असली स्टार बने एडमंड
इस ऐतिहासिक फाइनल की सबसे बड़ी तस्वीर एडमंड ललरिंदिका की हैट्रिक रही।
उन्होंने 12वें, 22वें और 44वें मिनट में तीन गोल किए। खास बात यह रही कि तीनों गोल पहले हाफ में आए और उन्होंने अकेले ही ईस्ट बंगाल की जीत की नींव मजबूत कर दी।
इस प्रदर्शन के बाद एडमंड का नाम डूरंड कप के कोलकाता डर्बी इतिहास में भी खास तौर पर दर्ज हो गया। वह इस मुकाबले में हैट्रिक लगाने वाले खिलाड़ियों की खास सूची में शामिल हो गए हैं।
फाइनल जैसे बड़े मुकाबले में इस तरह का प्रदर्शन किसी भी खिलाड़ी के लिए यादगार होता है। एडमंड के लिए तो यह मुकाबला उनके करियर के सबसे खास मैचों में शामिल हो गया।
ईस्ट बंगाल की जीत में सिर्फ एडमंड ही नहीं, पूरी टीम का योगदान
भले ही फाइनल के बाद सबसे ज्यादा चर्चा एडमंड की हुई, लेकिन ईस्ट बंगाल की जीत सिर्फ एक खिलाड़ी के दम पर नहीं आई।
बिपिन सिंह ने शुरुआत में गोल करके टीम को बढ़त दिलाई। इसके बाद मिडफील्ड और डिफेंस ने मोहन बागान को लगातार दबाव में रखा।
सबसे अहम बात यह रही कि ईस्ट बंगाल ने चार गोल करने के बाद भी अपना संतुलन नहीं खोया। दूसरे हाफ में टीम ने बढ़त को संभालते हुए मुकाबला अपने नियंत्रण में रखा।
यही टीमवर्क फाइनल में दोनों टीमों के बीच सबसे बड़ा अंतर भी साबित हुआ।
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ग्रुप स्टेज की हार का भी लिया बदला
इस फाइनल की कहानी को और दिलचस्प बनाता है दोनों टीमों का पहले का मुकाबला।
डूरंड कप 2026 के दौरान ईस्ट बंगाल और मोहन बागान पहले भी आमने-सामने आए थे। उस मुकाबले में मोहन बागान ने ईस्ट बंगाल को 1-0 से हराया था।
लेकिन फाइनल में ईस्ट बंगाल ने तस्वीर पूरी तरह बदल दी।
1-0 की पिछली हार के बाद 4-1 की शानदार जीत ने न सिर्फ ट्रॉफी दिलाई, बल्कि ईस्ट बंगाल को अपने चिर प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ जोरदार जवाब देने का मौका भी दिया।
2023 की हार का हिसाब भी हुआ बराबर
ईस्ट बंगाल के लिए 2026 का फाइनल इसलिए भी खास रहा क्योंकि 2023 के डूरंड कप फाइनल में उसे मोहन बागान के हाथों हार का सामना करना पड़ा था।
उस मुकाबले में मोहन बागान ने 1-0 से जीत दर्ज करके ट्रॉफी अपने नाम की थी।
तीन साल बाद दोनों टीमें फिर फाइनल में आमने-सामने थीं। इस बार कहानी पूरी तरह अलग थी। ईस्ट बंगाल ने 4-1 से जीत दर्ज की और 17वें डूरंड कप खिताब के साथ अपने पुराने प्रतिद्वंद्वी की बराबरी कर ली।
अब दोनों क्लबों के नाम 17-17 खिताब
डूरंड कप 2026 के बाद टूर्नामेंट के सबसे सफल क्लब को लेकर मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।
ईस्ट बंगाल ने 17वां खिताब जीत लिया है, जबकि मोहन बागान के नाम भी 17 डूरंड कप ट्रॉफियां हैं। यानी दोनों कोलकाता क्लब अब बराबरी पर हैं।
फुटबॉल के लिहाज से यह बराबरी भविष्य में होने वाली हर ईस्ट बंगाल-मोहन बागान भिड़ंत को और खास बना सकती है।
Durand Cup 2026 Final का पूरा स्कोर
ईस्ट बंगाल – 4 गोल
- बिपिन सिंह – 10वां मिनट
- एडमंड ललरिंदिका – 12वां मिनट
- एडमंड ललरिंदिका – 22वां मिनट
- एडमंड ललरिंदिका – 44वां मिनट
मोहन बागान सुपर जायंट – 1 गोल
- मनवीर सिंह – 33वां मिनट
ईस्ट बंगाल के चारों गोल पहले हाफ में आए और एडमंड ने अकेले तीन गोल किए।
फाइनल में क्या रहा सबसे बड़ा फर्क?
अगर पूरे मुकाबले को देखा जाए तो सबसे बड़ा फर्क ईस्ट बंगाल की तेज शुरुआत और मौके भुनाने की क्षमता रही।
10वें मिनट में बिपिन सिंह के गोल के बाद 12वें मिनट में एडमंड का गोल आया। फिर 22वें मिनट में एडमंड ने अपना दूसरा गोल करके मोहन बागान पर दबाव और बढ़ा दिया।
मोहन बागान ने 33वें मिनट में मनवीर सिंह के जरिए एक गोल जरूर किया, लेकिन ईस्ट बंगाल ने 44वें मिनट में फिर जवाब दे दिया।
यानी जब भी मोहन बागान को वापसी की उम्मीद दिखी, ईस्ट बंगाल ने तुरंत उस उम्मीद को तोड़ दिया।
22 साल का इंतजार ऐसे हुआ खत्म
ईस्ट बंगाल के फैंस के लिए 2004 के बाद डूरंड कप जीतना सिर्फ एक आंकड़ा नहीं था। इतने लंबे समय तक ट्रॉफी का इंतजार करना और फिर उसी ट्रॉफी के फाइनल में अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी को 4-1 से हराना इस जीत को और खास बनाता है।
2004 में ईस्ट बंगाल ने मोहन बागान को 2-1 से हराकर डूरंड कप जीता था। 2026 में फिर सामने मोहन बागान था, लेकिन इस बार जीत का अंतर कहीं बड़ा रहा।

निष्कर्ष
Durand Cup 2026 Final ईस्ट बंगाल के लिए किसी सपने के सच होने जैसा रहा। टीम ने मोहन बागान को 4-1 से हराकर 22 साल बाद डूरंड कप की ट्रॉफी अपने नाम कर ली।
एडमंड ललरिंदिका इस जीत के सबसे बड़े नायक रहे, जिन्होंने फाइनल में शानदार हैट्रिक लगाई। बिपिन सिंह ने एक गोल किया, जबकि मोहन बागान की ओर से मनवीर सिंह का गोल टीम को हार से नहीं बचा सका।
इस जीत के साथ ईस्ट बंगाल ने अपना 17वां डूरंड कप खिताब जीता और अब वह मोहन बागान के साथ सबसे ज्यादा खिताब जीतने वाले क्लबों की सूची में बराबरी पर है।
लेकिन इस फाइनल को याद किया जाएगा तो सिर्फ 4-1 के स्कोर के लिए नहीं। इसे याद किया जाएगा 22 साल के इंतजार के अंत, कोलकाता डर्बी की बड़ी जीत और एडमंड ललरिंदिका की शानदार हैट्रिक के लिए।
लाल-पीले रंग में सजे स्टेडियम में आखिरकार वह पल आ ही गया, जिसका ईस्ट बंगाल के समर्थकों को दो दशक से ज्यादा समय से इंतजार था—डूरंड कप फिर से उनके हाथ में था।