मुंबई: शिवसेना (यूबीटी) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी इन दिनों एक अलग वजह से सुर्खियों में हैं। हाल ही में उन्हें ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी में अकादमिक भूमिका मिली है। इसके बाद सोशल मीडिया पर यह चर्चा तेज हो गई कि क्या अब वह सक्रिय राजनीति से दूरी बनाने जा रही हैं। हालांकि, इन सभी अटकलों पर प्रियंका चतुर्वेदी ने खुद सामने आकर स्थिति साफ कर दी है।
आखिर क्यों उठने लगी राजनीति छोड़ने की चर्चा?
प्रियंका चतुर्वेदी ने हाल ही में सोशल मीडिया पर बताया कि उन्होंने ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी में पढ़ाना शुरू किया है। उन्होंने छात्रों के साथ अपने नए सफर की जानकारी साझा की और इसे अपने जीवन का नया अध्याय बताया।
बस इसी पोस्ट के बाद कई लोगों ने यह अनुमान लगाना शुरू कर दिया कि वह राजनीति छोड़कर पूरी तरह शिक्षा के क्षेत्र में जाने वाली हैं। देखते ही देखते यह चर्चा सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक पहुंच गई।
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प्रियंका चतुर्वेदी ने क्या कहा?
बढ़ती चर्चाओं के बीच प्रियंका चतुर्वेदी ने साफ शब्दों में कहा कि उन्होंने राजनीति छोड़ने का कोई फैसला नहीं लिया है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा और राजनीति दोनों समाज सेवा के मजबूत माध्यम हैं और वह दोनों क्षेत्रों में अपनी जिम्मेदारियां निभाती रहेंगी। उनके मुताबिक, विश्वविद्यालय में पढ़ाना केवल एक नई जिम्मेदारी है, राजनीति से दूरी बनाने का संकेत नहीं।
राजनीति के साथ शिक्षा में भी निभाएंगी अहम भूमिका
प्रियंका चतुर्वेदी ने बताया कि वह आने वाले समय में छात्रों को सार्वजनिक नीति, लोकतंत्र, नेतृत्व और समकालीन राजनीतिक विषयों पर अपने अनुभव साझा करेंगी। उनका मानना है कि युवाओं को व्यावहारिक राजनीति की समझ देना भी देश सेवा का एक महत्वपूर्ण तरीका है।
सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों पर लगाया विराम
उन्होंने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि कई लोग उनके नए शैक्षणिक दायित्व को राजनीतिक संन्यास समझ बैठे हैं, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है।
प्रियंका ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में योगदान देने के कई रास्ते होते हैं और शिक्षा उनमें सबसे प्रभावी माध्यमों में से एक है।
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नई जिम्मेदारियां भी रहेंगी साथ

राजनीति और शिक्षण के अलावा प्रियंका चतुर्वेदी ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) के Women Led Futures कार्यक्रम से भी जुड़ी हैं। इसके अलावा वह अपनी नई पुस्तक पर भी काम कर रही हैं।
यानी आने वाले समय में उनकी भूमिका राजनीति के साथ-साथ शिक्षा और नीति निर्माण जैसे क्षेत्रों में भी दिखाई देगी।
महिलाओं की राजनीति में भागीदारी पर दिया जोर
प्रियंका चतुर्वेदी लंबे समय से महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की पक्षधर रही हैं। उन्होंने कहा कि देश में अधिक से अधिक महिलाओं को नेतृत्व की भूमिका में आना चाहिए और वह इस दिशा में लगातार काम करती रहेंगी।
क्या राजनीति से दूरी बनाएंगी?
फिलहाल इसका जवाब ‘नहीं’ है।
प्रियंका चतुर्वेदी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह पहले की तरह सक्रिय राजनीति में बनी रहेंगी। उनका कहना है कि नई जिम्मेदारी उनके सार्वजनिक जीवन का विस्तार है, न कि राजनीति से विदाई।
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एक नजर में पूरी खबर
- ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी में मिली नई अकादमिक जिम्मेदारी।
- सोशल मीडिया पर राजनीति छोड़ने की अटकलें हुईं तेज।
- प्रियंका चतुर्वेदी ने सभी दावों को किया खारिज।
- शिक्षा और राजनीति दोनों में निभाएंगी सक्रिय भूमिका।
- महिलाओं के नेतृत्व और सार्वजनिक नीति पर भी करेंगी काम।
निष्कर्ष
आज के दौर में सार्वजनिक जीवन केवल राजनीति तक सीमित नहीं रह गया है। शिक्षा, नीति निर्माण और सामाजिक नेतृत्व भी उतने ही महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। प्रियंका चतुर्वेदी का नया शैक्षणिक सफर इसी सोच को आगे बढ़ाता है। उन्होंने साफ कर दिया है कि राजनीति से उनका रिश्ता पहले की तरह कायम रहेगा और नई जिम्मेदारी के साथ वह समाज के लिए और व्यापक स्तर पर काम करेंगी।
