Sitapur mahmudabad: सीतापुर जिले के महमूदाबाद क्षेत्र से स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर हैरान करने वाला मामला सामने आया है। पर्वतपुर चौराहे पर एक मेडिकल स्टोर की आड़ में कथित तौर पर करीब तीन साल से अस्पताल जैसी गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। मामला तब सामने आया जब यहां प्रसव के दौरान एक महिला और उसके नवजात बच्चे की मौत हो गई।
घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन किया और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की। मामला बढ़ने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जांच की और संबंधित परिसर को सील कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
मामला रामपुर मथुरा थाना क्षेत्र के पर्वतपुर चौराहे का है। यहां स्थित एक मेडिकल स्टोर पर प्रसव के लिए महिला को लाए जाने की बात सामने आई है।
रिपोर्टों के मुताबिक, बसावनपुर निवासी सावित्री को 3 सितंबर को प्रसव पीड़ा होने पर परिजन पर्वतपुर चौराहे स्थित मेडिकल स्टोर पर लेकर पहुंचे थे। परिजनों का आरोप है कि मेडिकल स्टोर के पीछे बने कमरे में प्रसव कराया जा रहा था।
इसी दौरान नवजात की मौत हो गई। इसके बाद महिला की हालत भी लगातार बिगड़ती चली गई। गंभीर स्थिति में उसे महमूदाबाद ले जाया गया, जहां से चिकित्सकों ने लखनऊ रेफर कर दिया। हालांकि, लखनऊ ले जाते समय रास्ते में महिला की भी मौत हो गई।
जच्चा-बच्चा की मौत के बाद मचा हंगामा
महिला और नवजात की मौत की खबर जैसे ही परिजनों और ग्रामीणों को हुई, उनका आक्रोश बढ़ गया। शुक्रवार को बड़ी संख्या में लोग पर्वतपुर चौराहे पर पहुंचे और शव सड़क पर रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया।
प्रदर्शन के कारण महमूदाबाद-रेउसा मार्ग पर यातायात प्रभावित हुआ। परिजन मेडिकल स्टोर पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे।
स्थिति को देखते हुए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने परिजनों को जांच और कार्रवाई का भरोसा दिया, जिसके बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ।
यह भी पढ़े- सीतापुर में मौसम ने बदली करवट! आज बारिश का अलर्ट, जानें अगले 3 दिन
जांच में सामने आया तीन साल से संचालन का मामला
जच्चा-बच्चा की मौत के बाद प्रशासन के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने संबंधित मेडिकल स्टोर की जांच की।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, जांच में मेडिकल स्टोर की आड़ में करीब तीन साल से अस्पताल संचालित किए जाने की बात सामने आई। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि दो मौतों के बाद हुई जांच में मामला सामने आया, जिसके बाद विभाग ने परिसर को सील कर दिया।
यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि वहां लंबे समय से अस्पताल जैसी गतिविधियां चल रही थीं तो स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं हो सकी।
स्वास्थ्य विभाग ने परिसर किया सील
मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई करते हुए संबंधित परिसर को सील कर दिया। अन्य रिपोर्टों के अनुसार, जांच टीम ने मेडिकल स्टोर के पीछे संचालित कथित क्लीनिक का निरीक्षण किया था। इसके बाद संचालक के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की बात सामने आई है।
हालांकि, महिला और नवजात की मौत की वास्तविक वजह क्या थी और इलाज के दौरान किस स्तर पर लापरवाही हुई, इसका अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा।
यह भी पढ़े- Avantika Gupta कौन हैं? सीतापुर स्कूल विवाद में क्यों आया नाम, जानिए पूरा मामला
संचालक और स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई
मामले में मेडिकल स्टोर संचालक अजय सिंह और स्टाफ नर्स पुष्पा देवी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि संबंधित स्थान पर किस तरह की चिकित्सा गतिविधियां संचालित की जा रही थीं और वहां प्रसव कराने की अनुमति या जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं मौजूद थीं या नहीं।
किसी भी व्यक्ति को जांच पूरी होने से पहले दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। आगे की कानूनी कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों पर निर्भर करेगी।
ग्रामीण इलाकों में अवैध क्लीनिक बड़ी चिंता
सीतापुर की यह घटना सिर्फ एक परिवार के लिए दर्दनाक हादसा नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की निगरानी पर भी सवाल खड़े करती है।
कई बार ग्रामीण इलाकों में लोग नजदीक और कम खर्च में इलाज की उम्मीद में छोटे मेडिकल स्टोर या निजी केंद्रों पर पहुंच जाते हैं। लेकिन प्रसव जैसे संवेदनशील मामलों में अचानक स्थिति बिगड़ने पर प्रशिक्षित डॉक्टर, ऑपरेशन की सुविधा, ब्लड बैंक और नवजात के लिए जरूरी चिकित्सा व्यवस्था की जरूरत पड़ सकती है।
ऐसे में बिना पर्याप्त सुविधाओं वाले स्थान पर प्रसव कराना जोखिम भरा हो सकता है।
जांच के बाद साफ होगी पूरी तस्वीर
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई के बाद संबंधित परिसर सील किया जा चुका है और पुलिस स्तर पर भी मामला दर्ज होने की जानकारी है।
अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि वहां कितने समय से चिकित्सा गतिविधियां चल रही थीं, किसकी जानकारी में यह काम हो रहा था और जच्चा-बच्चा की मौत की परिस्थितियां क्या थीं।
इस पूरे मामले में प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट अहम होगी। उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
यह भी पढ़े- सीतापुर में सोने के भाव ने मचाई हलचल! आज Gold का रेट जानकर चौंक जाएंगे खरीदार

इस घटना से क्या सीख मिलती है?
गर्भावस्था और प्रसव के मामलों में केवल नजदीक या कम खर्च वाले स्थान को देखकर इलाज का फैसला नहीं करना चाहिए। अस्पताल या प्रसव केंद्र की सुविधाओं, डॉक्टर की योग्यता और आपातकालीन व्यवस्था की जानकारी लेना जरूरी है।
सीतापुर की घटना ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे छोटे चिकित्सा केंद्रों की नियमित जांच और निगरानी कितनी जरूरी है।
फिलहाल इस मामले में जांच जारी है और आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर होने की उम्मीद है।