उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में एक बार फिर बाघ का आतंक देखने को मिला है। जिले के रसूलवा जंगल क्षेत्र में घास काटने गए एक ग्रामीण पर बाघ ने अचानक हमला कर दिया। हमले में ग्रामीण की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में भय का माहौल है और ग्रामीण खेतों व जंगल की ओर जाने से डर रहे हैं। सूचना मिलते ही वन विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची तथा जांच शुरू कर दी।
कैसे हुआ पूरा हादसा?
मिली जानकारी के अनुसार ग्रामीण सुबह के समय रोज की तरह रसूलवा जंगल क्षेत्र में पशुओं के लिए घास काटने गया था। इसी दौरान झाड़ियों में छिपे बाघ ने अचानक उस पर हमला कर दिया। आसपास मौजूद लोगों ने शोर मचाकर बाघ को भगाने की कोशिश की, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। गंभीर चोटों के कारण ग्रामीण ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। मृतक के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
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सीतापुर के गांवों में फैला डर, लोगों ने बदली दिनचर्या
इस दर्दनाक घटना के बाद आसपास के कई गांवों में दहशत का माहौल है। ग्रामीण अब अकेले खेतों या जंगल की ओर जाने से बच रहे हैं। कई परिवारों ने बच्चों और महिलाओं को भी घर से बाहर कम निकलने की सलाह दी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ समय से क्षेत्र में बाघ की आवाजाही देखी जा रही थी। कई बार वन विभाग को सूचना भी दी गई थी।
वन विभाग ने शुरू किया सर्च ऑपरेशन
घटना के बाद वन विभाग की टीम ने पूरे इलाके में सघन तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए जंगल और आसपास के क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि बाघ को सुरक्षित तरीके से पकड़ने या जंगल की ओर वापस भेजने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
इसके अलावा संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ाई गई है और ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
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प्रशासन ने लोगों से की यह अपील
प्रशासन और वन विभाग ने ग्रामीणों से कुछ जरूरी सावधानियां बरतने की अपील की है—
- जंगल या खेतों में अकेले न जाएं।
- सुबह और शाम के समय विशेष सतर्कता रखें।
- यदि कहीं बाघ दिखाई दे तो तुरंत वन विभाग को सूचना दें।
- किसी भी अफवाह पर भरोसा न करें।
- बच्चों को जंगल और खेतों के आसपास अकेले न जाने दें।
सीतापुर के इंसानों और वन्यजीवों के बीच बढ़ रहा संघर्ष
विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों का क्षेत्र लगातार कम होने और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास प्रभावित होने के कारण बाघ जैसे जंगली जानवर आबादी वाले इलाकों की ओर आ रहे हैं। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं। ऐसे मामलों में स्थानीय लोगों की सतर्कता और वन विभाग की त्वरित कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण होती है।
सीतापुर के ग्रामीणों की मांग
घटना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग से क्षेत्र में लगातार गश्त करने, बाघ की जल्द पहचान कर उसे पकड़ने तथा प्रभावित परिवार को शीघ्र आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि जब तक बाघ को सुरक्षित नहीं पकड़ा जाता, तब तक गांवों में डर का माहौल बना रहेगा।
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निष्कर्ष
सीतापुर के रसूलवा जंगल क्षेत्र में हुई यह घटना पूरे इलाके के लिए चिंता का विषय बन गई है। एक परिवार ने अपना सदस्य खो दिया, जबकि आसपास के गांवों में लोग भय के साए में जी रहे हैं। वन विभाग का सर्च ऑपरेशन जारी है और प्रशासन ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है। उम्मीद है कि जल्द ही बाघ की लोकेशन का पता लगाकर स्थिति को सामान्य बनाया जाएगा।
