सीतापुर: उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले से नाबालिग बच्ची से जुड़े गंभीर मामले में पुलिस की कार्रवाई सामने आई है। थानगांव क्षेत्र में छह वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के मामले में फरार चल रहे आरोपी को पुलिस ने मंगलवार सुबह मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक, घटना के करीब 12 घंटे के भीतर आरोपी तक पहुंच बनाई गई।
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से तमंचा, कारतूस और 350 रुपये नकद बरामद करने का दावा किया है। मामले में पुलिस अधीक्षक अंकुर अग्रवाल ने कार्रवाई करने वाली टीम को 25 हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा की है।
21 सितंबर को दर्ज हुआ था मुकदमा
पुलिस के अनुसार, छह वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म की शिकायत के आधार पर 21 सितंबर 2026 को थानगांव थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले में बीएनएस की धारा 96/65(2) और पॉक्सो एक्ट की धारा 5M/6 के तहत कार्रवाई की गई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने आरोपी की जल्द गिरफ्तारी और कड़ी कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद पुलिस टीमों ने आरोपी की तलाश शुरू की।
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बेर्रा गांव के पास पुलिस ने घेरा
पुलिस की कार्रवाई मंगलवार सुबह उस समय हुई, जब थानगांव पुलिस टीम ने ग्राम बेर्रा के पास आरोपी को घेर लिया। पुलिस के अनुसार, इसी दौरान आरोपी और पुलिस के बीच मुठभेड़ हुई और इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान अवधराम उर्फ भोले शंकर, पुत्र बुद्धा, निवासी सद्दुपुर महरिया, थाना सदरपुर के रूप में बताई गई है।
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आरोपी के पास से क्या मिला?
पुलिस के मुताबिक, तलाशी के दौरान आरोपी के कब्जे से:
- एक तमंचा
- कारतूस
- 350 रुपये नकद
बरामद किए गए हैं। इन बरामदगी को लेकर पुलिस ने आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
पुलिस टीम को 25 हजार रुपये का इनाम
आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अधीक्षक अंकुर अग्रवाल ने कार्रवाई करने वाली पुलिस टीम के लिए 25 हजार रुपये के इनाम की घोषणा की है।
पुलिस का कहना है कि घटना के बाद आरोपी की तलाश में टीमें लगाई गई थीं और करीब 12 घंटे के भीतर गिरफ्तारी की गई।
पॉक्सो एक्ट के तहत आगे की कार्रवाई
चूंकि मामला छह वर्षीय बच्ची से जुड़ा है, इसलिए इसमें पॉक्सो कानून के तहत कार्रवाई की जा रही है। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब मामले से जुड़े साक्ष्यों और अन्य तथ्यों की जांच करेगी।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि आरोपी पर लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा। गिरफ्तारी या पुलिस द्वारा लगाए गए आरोप अपने आप में दोष सिद्ध होने का अंतिम प्रमाण नहीं होते।
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नाबालिग की पहचान सार्वजनिक करना कानूनन संवेदनशील
नाबालिग से जुड़े यौन अपराध के मामलों में पीड़ित बच्चे की पहचान को सार्वजनिक न करना बेहद जरूरी है। इसी वजह से खबर में बच्ची का नाम, पता, परिवार या ऐसी कोई अन्य जानकारी नहीं दी गई है जिससे उसकी पहचान सामने आ सके यदि उनके माता पिता इस बात से सहमत हैं,तो यह बहुत अच्छी बात है,क्योंकि आज के समय में लड़कियों का सम्मान करना हम लोगों का फर्ज है, लेकिन कुछ ऐसे पापी इंसान है,जिनको भगवान ने इंसान तो बनाया लेकिन वह आज भी राक्षस है।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध पुलिस जानकारी और प्रकाशित रिपोर्ट के आधार पर तैयार की गई है। मामले की आगे की जानकारी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान सामने आ सकती है। या इस लेख में आगे की प्रक्रिया को पूरा होने के बाद अपडेट भी किया जा सकता हैं।