UP के लाखों गन्ना किसानों के लिए बड़ी खबर! 45 जिलों में शुरू हुआ गांववार गन्ना सर्वे, SMS से मिलेगी जानकारी

SMS-प्रदेश के लाखों गन्ना किसानों के लिए राहत और सतर्कता दोनों की खबर है। राज्य सरकार ने वर्ष 2026-27 पेराई सत्र की तैयारियों के तहत 45 गन्ना उत्पादक जिलों में गांववार गन्ना सर्वे और सत्यापन अभियान शुरू कर दिया है। यह अभियान 30 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान खेतों में लगी गन्ने की फसल का वास्तविक रकबा, किस्म और अन्य जरूरी जानकारी दर्ज की जाएगी, ताकि आगामी पेराई सत्र में किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

गन्ना विभाग का कहना है कि यह सर्वे किसानों के हित में है। इसलिए सभी किसान अपने गांव में सर्वे टीम के पहुंचने पर मौजूद रहें और दर्ज की जा रही जानकारी का सत्यापन जरूर करे

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आखिर क्यों किया जाता है गन्ना सर्वे?

हर साल चीनी मिलों द्वारा किसानों से गन्ना खरीदने से पहले गन्ना विभाग सर्वे कराता है। इसी सर्वे के आधार पर यह तय होता है कि किसान के पास कितने क्षेत्र में गन्ने की खेती है और वह कितनी मात्रा में गन्ना चीनी मिल को आपूर्ति करेगा।

यदि सर्वे में किसी प्रकार की गलती रह जाती है, तो भविष्य में गन्ना पर्ची जारी होने, तौल और भुगतान जैसी प्रक्रियाओं में दिक्कत आ सकती है।

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आधुनिक तकनीक से हो रहा है सर्वे

इस बार गन्ना विभाग ने सर्वे प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए GPS आधारित डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल किया है। सर्वे टीम एंड्रॉयड डिवाइस के जरिए खेतों की लोकेशन, वास्तविक क्षेत्रफल और गन्ने की किस्म का रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज कर रही है।

इससे फर्जीवाड़े की संभावना कम होगी और किसानों का सही डेटा विभाग के पास उपलब्ध रहेगा।

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SMS के जरिए मिलेगी पूरी जानकारी

सर्वे पूरा होने के बाद किसानों के मोबाइल नंबर पर SMS भेजा जाएगा। इसमें उनके खेत का दर्ज रकबा, गन्ने की किस्म और अन्य जरूरी विवरण होंगे।

अगर किसी किसान को दर्ज जानकारी में कोई गलती दिखाई देती है, तो वह निर्धारित समय के भीतर संबंधित गन्ना समिति या विभागीय अधिकारी से संपर्क कर सुधार करा सकता है।


नए किसानों के लिए भी सुनहरा मौका

जो किसान पहली बार गन्ने की खेती कर रहे हैं या अब तक विभाग में पंजीकृत नहीं हैं, वे भी इस अभियान के दौरान अपना पंजीकरण करा सकते हैं।

बिना पंजीकरण के किसान आगामी पेराई सत्र में चीनी मिलों को गन्ना आपूर्ति नहीं कर पाएंगे। इसलिए समय रहते पंजीकरण कराना बेहद जरूरी है।


किसानों को क्या करना चाहिए?

गन्ना विभाग ने किसानों को कुछ जरूरी सलाह भी दी है—

  • सर्वे टीम के गांव पहुंचने की जानकारी पर नजर रखें।
  • सर्वे के समय खेत पर मौजूद रहें।
  • खेत का रकबा और गन्ने की किस्म सही दर्ज हो रही है या नहीं, इसकी जांच करें।
  • मोबाइल नंबर सही दर्ज कराएं ताकि SMS समय पर मिल सके।
  • यदि कोई त्रुटि मिले तो तुरंत गन्ना समिति या संबंधित अधिकारी को सूचना दें।

सरकार का क्या है उद्देश्य?

उत्तर प्रदेश सरकार का लक्ष्य गन्ना सर्वे को पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटल बनाना है। सही सर्वे होने से किसानों को समय पर गन्ना पर्ची जारी होगी, गन्ने की खरीद प्रक्रिया सुचारु रहेगी और भुगतान में भी अनावश्यक देरी नहीं होगी।

सरकार का मानना है कि डिजिटल सर्वे से किसानों और चीनी मिलों दोनों को लाभ मिलेगा तथा पूरे गन्ना प्रबंधन सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ेगी।


निष्कर्ष

यदि आपके गांव में गन्ना सर्वे शुरू हो चुका है, तो इसे हल्के में न लें। सर्वे के दौरान मौजूद रहकर अपनी फसल से जुड़ी सभी जानकारी का मिलान जरूर करें। छोटी-सी लापरवाही भी भविष्य में गन्ना पर्ची और भुगतान में परेशानी का कारण बन सकती है। इसलिए समय रहते सभी विवरणों की जांच और सत्यापन कराना ही सबसे समझदारी भरा कदम होगा.

 

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